संविदा में अडिगता (#8715)

महिमा हो तेरी, हे ईश्वर, मेरे ईश्वर! तेरे नाम से मैं तुझसे याचना करता हूँ जिसके द्वारा तूने अपने मार्गदर्शन की ध्वजाओं को उच्च किया है और अपनी स्नेहमयी कृपालुता की कीर्ति-प्रभा बिखेरी है और अपने स्वामित्व की सत्ता को प्रकट किया है, जिसके द्वारा अपने नामों का दीपक अपने गुणों के निवास में तूने आलोकित किया है; और जिसके द्वारा वह, जो तेरी एकता का मण्डप-वितान और अनासक्ति का मूर्तरूप है, प्रकट हुआ है; जिसके माध्यम से तेरे मार्गदर्शन के पथों का ज्ञान हुआ है, तेरी प्रसन्नता के मार्ग रेखांकित किये गये हैं, जिसके द्वारा पाप करने वालों की नींव हिला दी गई है और दुष्टता के चिन्ह मिटा दिये गये हैं, जिसके द्वारा प्रज्ञा के निर्झर स्रोत प्रगट हुए हैं और दिव्य भोज की पाती भेजी गई है, जिसके द्वारा तूने अपने सेवकों को सुरक्षित किया है और अपनी सुकोमल दया उनके प्रति प्रकट की है और अपने प्राणियों के मध्य अपनी क्षमाशीलता दिखाई है, उसके नाम से मैं तुझसे याचना करता हूँ कि जो दृढ़ बना रहा है और जो तुझ तक वापस लौट आया है और तेरी दया की डोर थामे हुए है और तेरे प्रेमपूर्ण मंगल-विधान के परिधान की छोर से जुड़ा रहा है, उसे सुरक्षित रख और उसे तेरे द्वारा प्रदान की गई निरन्तरता से और तेरी इस उदात्त सत्ता से प्रदत्त प्रशांतता से मंडित कर। तू निश्चय ही आरोग्यदाता, संरक्षणदाता, सहायक, सर्वशक्तिमान, बलशाली, सर्वमहिमामय, सर्वज्ञाता है।

-Bahá'u'lláh
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संविदा में अडिगता (#8716)

महिमा हो तेरी, हे अनन्तता के सम्राट, राष्ट्रों के निर्माता और प्रत्येक जर्जर होती अस्थि के स्वरूपदाता! मैं तेरे उस नाम से प्रार्थना करता हूँ, जिसके द्वारा तूने समस्त मानवता का अपनी भव्यता और महिमा के क्षितिज की ओर आह्वान किया है और अपने सेवकों को अपनी गरिमा और अनुकम्पा के प्रांगण की राह दिखलाई है, कि तू मेरी गिनती उनमें कर जिन्होंने स्वयं को तेरे सिवा अन्य सभी कुछ से अनासक्त कर लिया है; और तेरी ओर बढ़ चला है और जिन्हें तेरे द्वारा भेजी गई परीक्षायें भी तेरे उपहारों की दिशा में मुड़ने से रोक नहीं पायी हैं। हे मेरे ईश्वर! तेरी कृपा की डोर को दृढ़ता से थामे हुए मैं तेरे अनुग्रह के परिधान के आंचल के लिपटा हुआ हूँ। अतः, मेरे ऊपर अपनी उदारता के मेघों से वर्षा कर जो मुझे तेरे अतिरिक्त अन्य सभी के स्मरण से मुक्त कर दे और मुझे उसकी ओर उन्मुख होने के योग्य बना दे जो समस्त मानवजाति की आराधना का लक्ष्य है; जिसके विरूद्ध द्रोह भड़काने वालों, संविदा तोड़ने वालों और तुझ पर और तेरे चिन्हों पर अविश्वास करने वालों ने व्यूह रचना की है।
हे मेरे स्वामी, अपने दिवसों में मुझे अपने परिधान की सुरभि से वंचित न कर और अपने मुखड़े के प्रभापुंजों के प्रकटीकरण की घड़ी में अपने धर्म प्रकाशन के उच्छ्वासों से मुझे अलग न रख। तू जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ है। तेरी इच्छा का उल्लंघन कोई भी नहीं कर सकता और न ही जिसे तूने अपनी शक्ति से निर्मित किया है, उसे कोई विफल कर सकता है। 
तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, सर्वसमर्थ, सर्वप्रज्ञ।

-Bahá'u'lláh
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संविदा में अडिगता (#8717)

वह सर्वशक्तिशाली, क्षमाशील, करुणामय है! हे ईश्वर मेरे ईश्वर! तू देखता है अपने इन सेवकों को जो द्रोह और भूलों की गर्त में पड़े हैं, तेरे दिव्य मार्गदर्शन की वह ज्योति कहाँ है? हे तू, विश्व की कामना! तू उनकी निस्सहायता और निर्बलता को जानता है। तेरी शक्ति कहाँ है, जिसके अधीन  धरती और आकाश की समस्त शक्ति है? 
तेरी स्नेहिल दया के प्रकाश के तेज के नाम से, तेरी प्रज्ञा के महासागर की तरंगों के नाम से, तेरी उस वाणी के नाम से, जिसने अपने साम्राज्य के जनों पर अपना आधिपत्य स्थापित किया है, मैं याचना करता हूँ, हे मेरे स्वामी! कि तू मुझको वर दे कि मैं उनमें से एक बनूं जिन्होंने तेरे ग्रंथ में विहित आदेशों का पालन किया है। मेरे लिये उसका विधान कर, जिसका विधान तूने अपने विश्वासपात्र सेवकों के लिये किया है, जिन्होंने तेरे कृपा-पात्र से दिव्य प्रेरणा की मदिरा का पान किया है और जो तेरी प्रसन्नता के लिये, तेरी संविदा में अडिग रहे हैं और तेरे विधानों के पालन की ओर अग्रसर हुए हैं। तू जैसा चाहे वैसा करने में समर्थ है। तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं, तू सर्वज्ञ, सर्वप्रज्ञ है। 
हे स्वामी अपनी कृपा से मेरे लिये उसका आदेश दे जो इहलोक और परलोक में मुझे समृद्ध बनाये और तेरे निकट ले आये। हे तू, जो सभी मनुष्यों का स्वामी है ! तेरे अतिरिक्त अन्य कोई ईश्वर नहीं है, एकमेव, शक्तिमान, महिमावंत।

-Bahá'u'lláh
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संविदा में अडिगता (#8718)

हे मेरे ईश्वर! अपनी राह में हमारे पगों को अडिग बना, हमारे हृदयों को अपने आदेश के पालन में समर्थ बना। अपनी एकता के सौन्दर्य की ओर हमें उन्मुख कर और हमारे अन्तर्मन को अपनी दिव्य एकता के चिन्हों से आह्लादित कर दे। अपनी कृपा के परिधान से हमारी काया को सजा दे। हमारी आँखों के सामने से पाप कर्मों के पर्दे हटा दे और हमें अपनी कृपा का वह पात्र दे जिससे तेरी भव्यता की अनुभूति कर सभी तेरा स्तुति करने लगे। अपनी कृपालु जिह्वा और अपने रहस्यमय अस्तित्व से तब वह प्रकट कर, हे मेरे ईश्वर, कि हमारी आत्माएँ प्रार्थना के अतिरेक से भर उठें और सभी पदार्थ तेरे प्रकटीकरण के प्रभापुंज के समक्ष अस्तित्वहीन हो जायें; ऐसी प्रार्थना जो शब्दों, स्वरों और समस्त संकेतों से परे, हृदय से निकली हो। हे ईश्वर, ये वे सेवक हैं जो तेरी संविदा और तेरे विधानों के अनुपालन में अडिग और अटल रहे हैं, जो तेरे धर्म के प्रति निष्ठा की डोर थामे हुए हैं और तेरे प्रताप के परिधान की आँचल से लिपटे हुए हैं। इन्हें अपनी अनुकम्पा दे, इनकी सहायता कर। हे मेरे ईश्वर! अपनी आज्ञापालन में इन्हें अडिग बना और अपनी शक्ति से इन्हें सम्पुष्ट कर। तू क्षमाशील, करुणामय है।

-`Abdu'l-Bahá
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संविदा में अडिगता (#8719)

हे करुणामय ईश्वर! धन्यवाद हो तेरा कि तूने मुझे जगाया, चेतना दी। देखने के लिये मुझे आँखे दीं और मुझे समर्थ कान दिये। तूने अपने साम्राज्य की राह दिखलाई, तूने मुझे सच्चा पथ दिखलाया और मुझे मुक्ति की नौका में प्रवेश दिया है। हे ईश्वर! मुझे अडिग बनाये रख और मुझे निष्ठा में अटल बना। प्रचण्ड परीक्षाओं से मेरी रक्षा कर अपनी संविदा के मंदिर और विधानों के दुर्ग में मुझे संरक्षण दे। तू सर्वदृष्टा है, तू सब की सुनने वाला है। 
हे तू करुणामय ईश्वर! मुझे एक ऐसा हृदय प्रदान कर जो दप्रण की भाँति तेरे प्रेम की ज्योति से प्रकाशित हो और अपनी दिव्य कृपा की वर्षा से मुझे ऐसे विचारों का दान दे, जो इस संसार को एक गुलाब वाटिका में बदल दे। 
तू करुणामय, कृपालु,  कल्याणकारी ईश्वर है।

-`Abdu'l-Bahá
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संविदा में अडिगता (#8720)

हे मेरे स्वामी और, मेरी आशा! तू अपने इन प्रियजनों को तेरी परम सामर्थ्‍यमय संविदा में अडिग रहने में, और तेरे इस प्रकटित धर्म के प्रति निष्ठावान रहने में, तेरे महिमाओं के ग्रंथ में विहित आदेशों का पालन करने में सहायता कर जिससे कि ये दिव्य लोक के सहचरों के मार्गदर्शन की ध्वजा और दीपक बन सकें, तेरी अनन्त प्रभा के निर्झर स्रोत और सच्चा पथ दिखाने वाले वे तारक बन सकें, जो उस दिव्य गगन से जगमगाते हैं। 
निश्चय ही तू अजेय, सर्वसमर्थ, सर्वशक्तिमान् है।

-`Abdu'l-Bahá
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